वर्ना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहां थी….!
कोई तेरा ही हमशक्ल है जो सोने नहीं देता…!
क्योंकि मोहब्बत में बस दर्द पाया है मैंने।
किसी पे ऐसा भी वक़्त आए, कभी ख़ुदा ना करे,
बहुत अफजल हो तुम तुम्हे नायाब लिख देता हु,
जख्म दिल के पुराने, दर्द अभी भी ताज़ा है,
जिसे छोड़ देते हैं… उसी को सबसे ज़्यादा याद करता है।
की कोई था जो बिना मतलब के चाहता था तुम्हे…!
कौन कहता है बरबादी किसी के काम नहीं आती
आंसू छुपा रहा हूँ तुमसे दर्द बताना नहीं आता
मुझे इसलिए बनाया उस भगवान ने, क्योंकि वो देखना चाहते थे, इंसान किस हद तक दर्द सह सकता है…!
मोहब्बत दिल से की थी मगर किस्मत से हारी,
इन ज़ख़्मों से, इन सवालों से बहुत Sad Shayari in Hindi दूर हो जाऊँ…
वरना कुछ पल का साथ तो जनाजा उठाने वाले भी देते है…!
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